विवेकानंद के 21 महत्वपूर्ण प्रेरक विचार vivekanand Quotes in hindi

स्वामी विवेकानंद को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में जाना जाता है। इन्ही के जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। जिसे 12 जनवरी को हर वर्ष बड़ी धूमधाम मनाया जाता है। ये वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली गुरु थे।

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विवेकानंद जी के विचार किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन को सार्थक बना सकते है। आइये जानते है उनके कुछ महत्वपूर्ण विचारो को।

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1.साहस के साथ सत्य कहो उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं इस और ध्यान मत दो।

Vivekanand ji
Vivekanand ji

2. एक विचार लो उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचार किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है।

3. हम जो बोते हैं वह काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं। हवा बहती हैं तो वो जहाज जिनके पाल खुले हैं, हव से टकराते हैं और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं, पर वो जिनके पाल बंधे होते हैं वह हवा को नहीं पकड़ पाते। क्या यह हवा की गलती है?

4. चालाकी से कोई महान कार्य नहीं होता पूर्ण सफलता पवित्रता विशाल बुद्धि और इच्छाशक्ति इन गुणों से संपन्न मुट्ठी भर लोग काम करें तो सारी दुनिया उलट-पुलट हो जाएगी

5. दिन में एक बार स्वयं से बात करो वरना दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आदमी से बात नहीं कर पाओगे।

 Swami Vivekanand
Swami Vivekanand

6. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। हम अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।

7. किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या न आए तो यह समझ लेना चाहिए कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

8. प्रेम विस्तार हैं, स्वार्थ संकुचन हैं। इसलिए प्रेम जीवन का सिद्धांत हैं। वह जो प्रेम करता है जीता है। वह जो स्वार्थी है मर रहा है। इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करो क्योंकि जीने का यही एकमात्र सिद्धांत है। वैसे ही जैसे जीने के लिए सांस लेते हैं।

9. अपने आप पर श्रद्धा करना सीखो। इसी आत्मश्रद्धा के बल पर अपने पैरों पर खड़े हो जाओ और शक्तिशाली बनो। प्राचीन धर्म के अनुसार जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता वह नास्तिक है। नूतन धर्म कहता है जिसमें आत्मविश्वास नहीं वही नास्तिक है।

10. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।

स्वामी विवेकानंद
विवेकानंद

11. जिस समय जिस कार्य को करने के लिए प्रतिज्ञा लो उसी समय उस कार्य को कर लेना चाहिए वरना लोगों का विश्वास उठ जाता है।

12. जो व्यक्ति सांसारिक मोह माया में नहीं पड़ता, समझो उस व्यक्ति ने मृत्यु को प्राप्त कर लिया है।

13. एक सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, और हजार तरीकों से बताने पर भी सत्य असत्य में परिवर्तित नहीं हो सकता है।

14. वह व्यक्ति जो अपने लिए कुछ नहीं मांगता है अथार्थ जो निस्वार्थ भावना से किसी कार्य को करता है। सच्चे अर्थों में वही सफल व्यक्ति होता है।

15. शारीरिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक रूप से जो भी आपको कमजोर बनाता है उसे जहर की तरह त्याग देना चाहिए।

16. सबसे बड़ा पाप खुद को कमजोर समझना होता है।

Swami vivekanand
Swami vivekanand

17. यदि हम अपने हृदय और दूसरी जीवित प्राणियों में ईश्वर को नहीं देख सकते तो हम कहीं भी भगवान को नहीं खोज कर सकते हैं।

18. संपूर्ण विश्व एक व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं ।

19. जैसा हम विचार रखते हैं हम वैसे ही बन जाते हैं विचार अमर हैं।

स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद

20. मनुष्य के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यह सोचना कि कुछ असंभव है यही सबसे बड़ा पाप है।

21. जो अग्नि हमें गर्म रखती है, वही अग्नि हमें नष्ट भी कर सकती हैं। इसमें अग्नि का कोई दोष नहीं है।

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