Sc/St Act 1989

अनुसूचित जाति/जनजातीय अधिनियम ( अत्याचार निरोधक) 1989 (Sc/St Act 1989) चर्चा में क्यों?

Sc/st act

चूंकि इस अधिनियम में अभियुक्त की तुरंत गिरफ्तारी होती है।ऐसे में यह हमेशा विवाद का विषय रहा है क्योंकि कई बार राजनीतिक दबाव में,अथवा आपसी रंजिश में इसका दुरुपयोग होता है।नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में 2016 में 11060 ऐसे केस दर्ज किए गए परंतु उनमें 935 शिकायतें गलत मिली।इन सब को देखते हुए इस अधिनियम के खिलाफ याचिका कोर्ट में दायर की गई है।

उच्चतम न्यायालय का इस अधिनियम पर वक्तव्य।

उच्चतम न्यायालय का इस अधिनियम के बारे में यह वक्तव्य है कि इस अधिनियम ने समाज में जातिवाद को कम नहीं किया है जैसी की इससे आशा की गयी थी बल्कि इसके प्रतिकूल प्रभाव देश की सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों पर पड़े हैं। अतः सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम के लिए नई गाइडलाइन जारी की है

उच्चतम न्यायालय की नई गाइडलाइन।

* अब मामले की जांच कम से कम डिप्टी एसपी रैंक का अधिकारी करेगा जो पहले इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी करता था।

* ‎किसी भी सरकारी अधिकारी की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी उसके खिलाफ उसके लिए पहले उसके विभाग की इजाजत लेनी होगी।

* ‎इस मामले में किसी भी व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी गिरफ्तारी से पहले जिले के SP या SSP से इजाजत लेनी होगी।

* इसमें अग्रिम जमानत भी दी जा सकती हैं,पहले अग्रिम जमानत नहीं होती थी। 

* ‎पहले जमानत हाईकोर्ट के द्वारा ही जारी होती थी परंतु अब यह अधिकार मजिस्ट्रेट को दे दिया गया है।

इस गाइडलाइन की आलोचना क्यों?

1. जजो ने इस मामले की सुनवाई में इस बात की बिल्कुल भी परवाह नही की कि कैसे इन समुदायों पर शोषण के मामले बढ़ते जा रहे है, क्योकि इस अधिनियम को सही से लागू नही किया जा रहा है और पुलिस व प्रशासन पूरी कोशिश करती है कि कैसे इन मामलों पर कोई कार्यवाही न हो।

2. ‎न्यायालय ने इस बात पर गौर नही किया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में कुल दर्ज मामलो में से केवल 15.4% मामलो में ही कार्यवाही हुई है।

3.जजो ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो में सिर्फ यही क्यू देखा कि कितने मामलो में झूठी शिकायते मिली है,यह क्यों नही देखा कि कितने मामले दर्ज हुए है, जो कि झूठे मामलो से कई गुना ज्यादा है।

4. न्यायालय ने सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय की उस रिपोर्ट पर गौर क्यों नही किया जिसमें बताया गया है कि 2015 में कैसे कुल दर्ज मामलो में से केवल कुछ मामलों में ही आरोपियों को सजा हुई है बाकी सब मामले या तो दबाव में वापस ले लिए गए या सबूतों के अभाव में आरोपी बरी कर दिए गए।

5. ‎न्यायालय ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के उन आंकड़ो पर गौर क्यो नही किया जिसमें बताया गया कि कैसे 2016 अनुसूचित जाति के प्रति दस लाख लोगों की जनसँख्या पर 214 केस दर्ज हुए है जो कि पिछले साल 207 मामलो से ज्यादा है।

6. ‎आलोचना यह कहकर भी की जा रही है अगर किसी व्यक्ति को इसमें जमानत मिल जाती है,तो यह जरूरी नहीं है कि वह निर्दोष हो क्योकि ज्यादातर केस में जांच ही रुक जाती है क्योकि गवाहों को और शिकायतकर्ताओं को डराया जाता है।

                 उच्चतम न्यायालय को चाहिए था कि इस अधिनियम को कमजोर न करके इसके सारे प्रावधानों को और कठोरता से लागू करने के निर्देश दें।ताकि SC /ST समुदाय के लोगों के साथ कोई भेदभाव ना हो,और नाही गैर SC/ST समुदाय के साथ नाइंसाफी हो।

और पढ़े : sc/st act क्या है?

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