राष्ट्रीय आय के मापन(गणना) की विधियां तथा अनुमान

राष्ट्रीय आय की मापन(गणना) की विधि तथा अनुमान (Methods of measuring National Income)

भारत मे सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय का अनुमान 1868 ई० में दादाभाई नौरोजी ने लगाया था। उन्होंने तत्कालीन भारत मे प्रति व्यक्ति आय 20 रू वार्षिक बताया था। (राष्ट्रीय आय के मापन(गणना) की विधियां)

राष्ट्रीय आय के अनुमान के लिए वैज्ञानिक विधि का प्रयोग करने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति प्रोफेसर वी० के० आर० वी० राव थे। स्वतंत्र भारत में 1949 में पी सी महालनोबिस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय आय से संबंधित अपने दो रिपोर्ट प्रस्तुत की किंतु इसी बीच इस कार्य को ठीक से करने के लिए एक स्थाई संगठन स्थापित किया गया, जिसका नाम केंद्रीय सांख्यिकी संगठन है।इसकी स्थापना 1951 में की गई केन्द्रीय साख्यिकी संगठन साख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।वर्तमान समय में भी यही संस्था राष्ट्रीय आय सम्बन्धी आंकड़े प्रस्तुत करती हैं।

‎चूंकि पी सी महालनोबिस का जन्म दिवस 29 जून को आता है अतः इस दिवस को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रुप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय आय के मापन की विधियां

राष्ट्रीय आय की माप के लिये मुख्यतया तीन विधियों का प्रयोग किया जाता है :-

  1. उत्पाद विधि (Value Added Method)
  2. आय विधि (Income Method)
  3. व्यय विधि (Expenditure Method)

         भारत में राष्ट्रीय आय की माप के लिए उत्पादन विधि तथा आय विधि के मिश्रित रूप का प्रयोग किया जाता है। जबकि व्यय विधि का प्रयोग अत्यंत नगण्य होता है क्योंकि भारत में इसके पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं है।

और पढ़े :    राष्ट्रीय आय की अवधारणा (Concept Of National Income)

जीडीपी और जीवीए में अंतर (Difference Between GDP And GVA)

1. उत्पाद विधि (Value Added Method)

उत्पादन विधि में मुख्यतः तीन क्षेत्रो को सम्मिलित किया जाता है। प्राथमिक क्षेत्र,द्वितीयक क्षेत्र तथा तृतीय क्षेत्र। तथा इन तीनों क्षेत्रों से 1 वर्ष के भीतर उत्पादित वस्तुओं की मूल्य की गणना की जाती है इस विधि में। यहाँ प्राथमिक क्षेत्र में कृषि वानिकी, मत्स्य पालन, खनन को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 14% होता है। द्वितीयक क्षेत्र में निर्माण एवं विनिर्माण में बिजली गैस एवं जलापूर्ति को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 28% होता है।  जबकि तृतीयक क्षेत्र के अन्तर्गत बीमा,बैंकिंग,व्यपार,होटल,परिवहन, संचार सेवा क्षेत्र इत्यादि को शामिल किया जाता है। इसका GDP में योगदान लगभग 58% होता है। सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) कहते हैं।

2. आय विधि (Income Method)

इस विधि में देश के विभिन्न वर्गों द्वारा अर्जित आय को जोड़ा जाता है। इस विधि के अंतर्गत राष्ट्रीय आय की गणना करते समय एक निश्चित दिए हुए वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों जैसे मजदूरी एवं पारिश्रमिक,विदेशों से साधनों की शुद्ध आय,लाभांश,लगान और किराया,सरकारी उद्यमों के लाभ,अतिरिक्त लाभ,ब्याज,कर्मचारियों के कल्याण के लिए अंशदान,स्वनयुक्त (Self-Employed) आय इत्यादि का समग्र योग किया जाता है। इसे सकल राष्ट्रीय आय (GNI) कहते हैं।

3. व्यय विधि (Expenditure Method)

इस विधि के अंतर्गत किसी दिए हुए वर्ष में राष्ट्रीय आय की गणना करते समय उपभोग व्यय,निवेश व्यय,सरकारी व्यय तथा आयातों पर किया गया व्यय का समग्र योग किया जाता है। इसे सकल राष्ट्रीय व्यय (GNE) कहते हैं।

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