अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization)

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization या IMO )

IMO
IMO

यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है। जिसकी स्थापना 1948 में जिनेवा में की गई थी।परंतु उसके 10 साल बाद 1959 में इसकी पहली बैठक संपन्न हुई। 1982 तक इस संगठन को अंतर-सरकारी समुद्री सलाहकारी संगठन के नाम से जाना जाता था।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का उद्देश्य

इस संगठन का मुख्य उद्देश्य महासागर में पोत परिवहन के लिए एक व्यापक नियामक ढांचे का विकास और रखरखाव करना है। जिसमें आज सुरक्षा, पर्यावरणीय चिंताएं,कानूनी मामलों, तकनीकी सहयोग,समुद्री सुरक्षा और नौवहन दक्षता शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का मुख्यालय ( International Maritime Organization Headquarters)

इस संगठन का मुख्यालय लंदन में स्थित है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के सदस्य देश (International Maritime Organization Members)

इस संगठन में 173 देश सदस्य के रूप में शामिल है, तथा 3 देश सहायक सदस्य के रूप में शामिल है।

महत्वपूर्ण सम्मेलन

* इंटरनेशनल कन्वेशन फ़ॉर द सेफ्टी ऑफ लाइफ एट सी (SOLAS) 1974 : इसका उद्देश्य जहाजो की सुरक्षा के लिए उपयुक्त न्यूनतम मानकों का निर्धारण करना है।इसके अन्तर्गत जहाज निर्माण,सम्बंधित उपकरणों व जहाज संचालन हेतु मानकों का निर्धारण सम्मिलित है।

* ‎इंटरनेशनल कन्वेशन ऑन सिविल लिबर्टी फ़ॉर बंकर ऑइल पॉल्युशन डेमेज (BUNKER) : इसका उद्देश्य बंकरो में तेल ले जाने वाले जहाजो से हुए तेलों के रिसावो के कारण होने वाली क्षति से प्रभावित लोगों को पर्याप्त, त्वरित व प्रभावी क्षतिपूर्ति उपलब्ध करवाना है।

* ‎इंटरनेशनल कन्वेशन फ़ॉर द कंट्रोल एन्ड मैनजमेंट ऑफ शिप्स बेलास्ट वाटर एन्ड सेडीमेंट्स (BWM) : यह सितंबर 2017 में प्रभाव में आया। इसका उद्देश्य जहाजो के बेलास्ट वाटर ( जहाजो को स्थिर बनाये रखने हेतु भार के रूप में रखा गया जल) एवं गाद के प्रबंधन हेतु मानक स्थापित करना है। इन मानकों द्वारा हानिकारक जलीय जीवों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में प्रसारित होने से रोका जा सकेगा।

भारत तथा IMO

* भारत IMO के आरंभिक सदस्यों में से एक है। इसने 1959 में इसकी सदस्यता प्राप्त की थी। इसने इसके कई सारे प्रोटोकॉल और सम्मेलनों का अनुसमर्थन किया है।

* ‎ भारत IMO को जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ मानव बल प्रदान करता है। उदाहरण के लिए भारतीय लेखा परीक्षक, वॉलेंटियरी आईं एम ओ मेंबर स्टेट ऑडिट स्कीम में अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं।

भारत के लिए IMO निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

* भारतीय व्यापार के कुल व्यापार का 95% (मात्रा में) तथा 70% (मूल्य में) व्यापार समुद्री परिवहन के द्वारा किया जाता है।

* ‎ भारत में 12 प्रमुख तथा 200 छोटे बंदरगाह है। जिन पर कार्गो का प्रबंधन किया जाता है, और यह प्रबंधन प्रत्येक वर्ष बढ़ता जा रहा है।

भारत की समुद्री पहलें

* व्यापारिक जहाजो की सुरक्षा हेतु SOLAS कनवेंशन की पुष्टि।

* ‎IMO तथा कांटेक्ट ग्रुप ऑन पायरेसी ऑन द कोस्ट ऑफ़ सोमालिया (CGPCS) के साथ मिलकर हिंद महासागर के उच्च जोखिम क्षेत्र में  सक्रिय पहल।

* ‎भारत ने ILO को सीफेरर आईडेंटी डाक्यूमेंटस कनवेंशन(संशोधित), 2003 व मेरीटाइम लेबर कन्वेंशन, 2006 के संदर्भ में इंस्ट्रूमेंट्स ऑफ रेटिफिकेशन प्रस्तुत किया है।

आगे पढे : चर्चा में क्यों?

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