गुप्त काल की महत्वपूर्ण रचनाएं ( literatures of gupta empire)

गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग क्यो कहा जाता है?

गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है क्योंकि इस काल में भारतीय साहित्य का अद्भुत विकास हुआ।इसमें ना केवल साहित्य का ही विकास हुआ अपितु विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं चित्रकारी के क्षेत्र में भी काफी विकास हुआ। साथ ही साथ इस काल के शिल्पकारो का भी इतिहास में अपना एक अलग स्थान है। यही वजह है की इसे भारतीय इत्तिहास का स्वर्ण युग भी कहा जाता है।

गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था। तथा वास्तविक संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम था।

गुप्त काल में अनेक विषयों पर अनेक रचनाएं लिखी गई। भास के तेरह नाटक भी इसी काल के हैं। कालिदास की कृति अभिज्ञान शाकुंतलम् नाटक इसी काल में लिखा गया था जो इस काल सबसे ऊंचा नाम करता है। अभिज्ञान शाकुंतलम् नाटक प्रथम भारतीय रचना है जिसका अनुवाद यूरोपीय भाषाओं में हुआ है। ऐसी दूसरी रचना भगवत गीता है।

आज हम आपको गुप्त काल की महत्वपूर्ण रचनाओ के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको गुप्त काल के लौकिक साहित्य को समझने में मदद मिलेगी।

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गुप्त काल

गुप्त काल की महत्वपूर्ण रचनाएं

पुस्तक     लेखक
मेघदूत  कालिदास
रघुवंशकालिदास
अभिज्ञान शाकुंतलम्  
कालिदास
मालविकाग्निमित्रकालिदास
‎ऋतु संहारकालिदास
कुमारसंभवकालिदास
देवी चंद्रगुप्तमविशाखदत्त
मुद्राराक्षसविशाखदत्त
काव्य दर्शनदंडीन
स्वप्नवासवदत्ता  भास
अरुभंगभास
चारुदत्ता  भास
कादंबरीबाण
हर्षचरितबाण
प्रियदर्शिका  हर्ष 
नागानंद हर्ष 
रत्नावलीहर्ष
रावण वध  वत्सभट्टी
किरातार्जुनीयम्  भारवि
अमरकोश  अमर सिंह
चंद्र व्याकरणचंद्रगोमी
विसुद्विमग्गबुद्धघोष
वृहत्संहितावराहमिहिर
पंचसिद्धांतिकावराहमिहिर
ब्रम्ह सिद्धांतआर्यभट्ट
आर्यभट्टियमआर्यभट्ट
‎सूर्य सिद्धांतआर्यभट्ट
न्यायावतारसिद्धसेन 
पंचतंत्र  विष्णु शर्मा 
नीतिशास्त्र
कामंदक
कामसूत्रवात्सायन
‎चरक संहिताचरक 
मृच्छकटिकम्शूद्रक
योगाचारअसंग

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