fundamental rights in hindi – मौलिक अधिकार क्या है?

आज इस लेख में हम आपको सभी मौलिक अधिकारों के बारे में बताने जा रहे है। लेकिन उससे भी पहले यह जानना भी जरूरी होता है कि आखिर मौलिक अधिकार से क्या अभिप्राय है (fundamental rights in hindi), मौलिक अधिकार कौन-कौन से होता है (maulik adhikar in hindi),मौलिक अधिकारों का महत्व क्या है,मौलिक अधिकार की मांग कहा कर सकते है आदि।

मौलिक अधिकार से क्या अभिप्राय है? – fundamental rights in india

मौलिक अधिकारों का अर्थ या अभिप्राय – fundamental rights in hindi – maulik adhikar ki paribhasha – मौलिक अधिकार वे अधिकार होते हैं,जो देश अपने नागरिकों को प्रदान करता है। यह व्यक्ति के धार्मिक,राजनैतिक, शैक्षणिक,सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। इन अधिकारों के बिना व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर सकता है। चूंकि व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास ही इन पर टिका हुआ है जो यह बताता है कि मौलिक अधिकारों का महत्व क्या है व्यक्ति के लिए।

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मौलिक अधिकार अमेरिका देश के संविधान से ग्रहण किए गए हैं। इनका वर्णन (भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन) भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 के मध्य किया गया है।

मौलिक अधिकार की विशेषता – fundamental rights in hindi

मौलिक अधिकारों को कभी भी कम या छीना या इनका हनन नहीं किया जा सकता है। यदि किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकार का हनन होता है तो वह कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सकता है। अतः मौलिक अधिकार न्याय योग है।

प्रारंभ में कुल 7 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए थे ,किंतु 44 वा संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के तहत संपत्ति के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। वर्तमान में कुल 6 मौलिक अधिकार हैं। संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर विधिक अधिकार का दर्जा प्रदान किया गया है। इसका वर्णन अनुच्छेद 300 (क) में किया गया है।

मौलिक अधिकार कौन-कौन से हैं – Types of fundamental rights

भारतीय संविधान में वर्णित 6 मौलिक अधिकार (fundamental rights in india in hindi) निम्नलिखित हैं :

समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 से 18       

 अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता           

अनुच्छेद 15 धर्म मूल वंश जाति और लिंग जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा

अनुच्छेद 16 लोक नियोजक के समान अवसर ।           

अनुच्छेद 17 छुआछूत का अंत                       

Article 18 उपाधियों का अंत (शिक्षा, सैन्य को छोड़कर )                                                        

स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से 22                           

Article 19(1) बाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19 1a प्रेस की स्वतंत्रता यह सूचना जानने का अधिकार          

अनुच्छेद 19 1b शांतिपूर्ण बिना शस्त्र के एकत्रित होने तथा सभा या सम्मेलन करने की स्वतंत्रता         

Article 19 1c किसी भी प्रकार का संज्ञा समुदाय बनाने की स्वतंत्रता                                                         

Article 19 1d देश के किसी भी भाग में आवागमन की स्वतंत्रता                                                        

अनुच्छेद 19 e भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं भी निवास करने की स्वतंत्रता                                                         

अनुच्छेद 19 f भारत के राज्य क्षेत्र में कहीं भी व्यापार करने की स्वतंत्रता एवं जीवन चलाने की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 20 अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण                                           

Article 21 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता             

Article 21a शिक्षा का अधिकार इस अधिकार के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के समस्त बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है इस उल्लेख मूल संविधान में नहीं था इसे 86 वा संविधान संशोधन अधिनियम के तहत जोड़ा गया।

Article 22 गिरफ्तारी एवं बन्दीकरण के संबंध में संरक्षण                                                                

शोषण के विरुद्ध अधिकार अनुच्छेद 23 से 24

Article 23 मानव के व्यापार एवं बलात श्रम करना कानूनन अपराध है                                         

Article 24 6 से 14 वर्ष के किसी भी बच्चे को जोखिम भरे कार्य कारखानों उद्योगों में लगाने की मनाही।                                                                 

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 25 से 28

Article 25 कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी धर्म को मानने एवं उसका प्रचार प्रसार करने के लिए स्वतंत्र है।               

अनुच्छेद 26 भारतीय नागरिकों को अपने धर्म के लिए संस्थाएं स्थापित करने एवं उनका प्रबंधन संरक्षण एवं विदेश संबंध,संपत्ति अर्जित करने का अधिकार है।

अनुच्छेद 27 धर्म के नाम पर चंदा लेने बच्चन ना देने की स्वतंत्रता।                                                 

Article 28 राज विधि से संचालित शैक्षिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती।

सांस्कृतिक एवं शिक्षा संबंधी अधिकार अनुच्छेद 29 से 30

अनुच्छेद 29a भारतीय नागरिक को अपनी विशिष्ट भाषा लिपि संस्कृति को बचाए रखने का अधिकार है।

अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यक वर्ग को शैक्षणिक संस्था धर्म से संबंधित स्थापित करने का अधिकार है।

अनुच्छेद 29 b – भाषा लिपि संस्कृति के आधार पर किसी भी व्यक्ति को शैक्षणिक संस्थाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।  

संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 31 से 35

अनुच्छेद 32 अनुच्छेदों के माध्यम से मौलिक अधिकारों के उपचार दिए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन किया जाता है, तो वह सुप्रीम कोर्ट में,हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है, मौलिक अधिकार की मांग कर सकता है। इस मौलिक अधिकार को डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा ह्रदय कहा था।

Frequently Asked Questions

मौलिक अधिकार अमेरिका देश के संविधान से किए गए हैं।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान करता है। अर्थात व्यक्ति या राज्य के द्वारा किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के हनन पर इन अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत क्रमशः उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय शक्तियों को शून्य कर देता है जो मौलिक अधिकार को हनन करते है।

इनका वर्णन भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 के मध्य किया गया है।

संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 31 से 35 सर्वाधिक महत्वपूर्ण अधिकार है जिसे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान की आत्मा भी कहा है।

व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए संविधान में मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए भारतीय संविधान में संवैधानिक उपचारों के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में दर्जा दिया गया है। जिसके तहत किसी भी मौलिक अधिकार के हनन होने पर व्यक्ति उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है, और अपनी मौलिक अधिकारों को सुरक्षित कर सकता है।

इस लेख में आज हमने मौलिक अधिकारों समझा,अगर इस मे किसी तरह के सुधार या सुझाव की आवश्यकता है। तो आप हमें comment करके बता सकता है। धन्यवाद।

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