मूल(मौलिक) अधिकार एवं नीति निर्देशक तत्वों में अंतर

मूल (मौलिक) अधिकार(Fundamental rights)

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उनके नागरिको को दिए गए मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।व्यक्ति के नैतिक,भौतिक,आध्यात्मिक तीनों ही संदर्भों में संतुलित विकास के लिए आवश्यक न्यूनतम अधिकार मूलाधिकार होते हैं, और विधि का शासन इन्हें अर्थपूर्ण बनाने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि इन्हें कतिपय प्रतिबंधों के साथ लागू किया जाता है और कतिपय शब्द परिस्थिति पर निर्भर होते हैं।इस प्रकार विधि के शासन में परिस्थिति का शासन छुपा हुआ है।

नीति निर्देशक (सिद्धान्त) तत्व (Directive principles)

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में नीति निर्देशक तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।नीति निर्देशक तत्व राज्य का आम नागरिकों के प्रति दायित्व है, जिन्हें अनुच्छेद 37 में शासन का मूलभूत घोषित किया गया है|सर्वप्रथम इन्हें आयरलैंड के संविधान में लागू किया गया था।

 

मूल अधिकार एवं नीति निर्देशक तत्वों में अंतर(Difference between Fundamental rights and Directive principles)

  1. मूल अधिकार मनुष्य के एक प्रकृति प्रदत्त अधिकार होते हैं,जबकि नीति निदेशक तत्व को अनुच्छेद 37 में शासन का मूलभूत घोषित किया गया है ।
  2. मूल अधिकारों के साथ कानूनी पक्ष जुड़ा हुआ होता है अथार्थ यह वाद योग्य होते हैं,जबकि नीति निर्देशक तत्वों के साथ नैतिक बल जुड़ा हुआ होता है अथार्थ यह वाद योग्य नहीं होते हैं ।
  3. मूल अधिकारों को अमेरिका से लिया गया है, जबकि नीति निदेशक तत्व को आयरलैंड से लिया गया है ।
  4. मूल अधिकार देश में व्यक्ति की राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं ,जबकि नृत्य निर्देशक तत्व सामाजिक आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं ।
  5. मूल अधिकार व्यक्ति के व्यक्तिगत अधिकार हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व राज्य के नागरिकों के प्रति दायित्व है तथा यह लोकनीति का मूल आधार है ।
  6. मूल अधिकार की बहाली से कई बार राज्यों को कार्य करने में रुकावट आती हैं,जबकि नीति निर्देशक तत्वों के साथ ऐसा नहीं होता है ।
  7. न्यायालय मूल अधिकारों के हनन की विधि को गैर-संवैधानिक घोषित कर सकता है जबकि नीति निर्देशक तत्वों में न्यायालय ऐसा नहीं करता है ।

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वित्त आयोग (Finance Commission), अनुच्छेद 280

मूल कर्तव्य / मौलिक कर्तव्य Fundamental Duties in hindi

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